20 फ़रवरी को 19 साल की छात्रा अमूल्या लियोना ने बेंगलुरु में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ आयोजित विरोध-प्रदर्शन में पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाया था. अमूल्या को बात पूरी करने का मौक़ा नहीं दिया गया और उसे मंच से खींचकर हटा दिया गया. बाद में उन पर राजद्रोह यानी आईपीसी की धारा 124-A लगा दी गई और अभी वो पुलिस हिरासत में हैं.
अमूल्या का पूरा वीडियो देखने पर पता चलता है कि वो इस नारे को समझाने की कोशिश कर रही हैं लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी, साथ ही इस बात को नज़रअंदाज़ कर दिया गया कि वे भारत ज़िंदाबाद के नारे भी लगा रही थीं.
लेकिन क्या 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगाना राजद्रोह है और पाकिस्तान मुर्दाबाद कहना देशभक्ति का सबूत?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे कहते हैं, "पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहना राजद्रोह नही है. राजद्रोह तो दूर की बात, यह कोई गुनाह भी नहीं है, जिसके आधार पर पुलिस गिरफ़्तार कर ले."
दवे कहते हैं, "पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध की बात संविधान में कही गई है. जिन्हें लगता है कि पाकिस्तान से नफ़रत ही देशभक्ति है वो भारत को नेशन-स्टेट के तौर पर नहीं समझते हैं. किसी एक देश से नफ़रत इतने बड़े मुल्क के प्रति वफ़ादारी का सबूत नहीं हो सकता. भारत के संविधान में भी इसकी कोई जगह नहीं है."
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब सरकार को दो कर्मचारियों बलवंत सिंह और भूपिंदर सिंह को 'खालिस्तान ज़िंदाबाद' और 'राज करेगा खालसा' का नारा लगाने के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. बलंवत और भूपिंदर ने इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटे बाद ही चंडीगढ़ में नीलम सिनेमा के पास ये नारे लगाए थे.
इन पर भी आईपीसी की धारा 124-A के तहत राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और 1995 में जस्टिस एएस आनंद और जस्टिस फ़ैज़ानुद्दीन की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह से एक दो लोगों का नारा लगाना राजद्रोह नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने कहा था, "दो लोगों का इस तरह से नारा लगाना भारत की सरकार और क़ानून-व्यवस्था के लिए ख़तरा नहीं है. इसमें नफ़रत और हिंसा भड़काने वाला भी कुछ नहीं है. ऐसे में राजद्रोह का चार्ज लगाना बिल्कुल ग़लत है."
सरकारी वकील ने ये भी कहा कि इन्होंने 'हिन्दुस्तान मुर्दाबाद' के भी नारे लगाए थे. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इक्के-दुक्के लोगों के इस तरह के नारे लगाने से इंडियन स्टेट को ख़तरा नहीं हो सकता.
कोर्ट ने कहा कि सेडिशन का सेक्शन तभी लगाया जाना चाहिए जब कोई समुदायों के भीतर नफ़रत पैदा करे. कोर्ट ने ये भी कहा कि पुलिस ने इन्हें गिरफ़्तार करने में अपनी परिपक्वता नहीं दिखाई क्योंकि तनाव के माहौल में इस तरह की गिरफ़्तारियों से स्थिति और बिगड़ सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इस तरह के माहौल में ऐसी कार्रवाइयों से हम समस्या ख़त्म नहीं करते बल्कि बढ़ाते ही हैं." अदालत ने बलवंत सिंह और भूपिंदर सिंह से राजद्रोह का मामला हटा लिया था.
ठीक ऐसा ही आरोप जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार के ऊपर लगा है. कन्हैया पर पर आरोप लगे चार साल हो गए लेकिन अभी तक पुलिस आरोपपत्र दायर नहीं कर पाई है.
अब दिल्ली सरकार की अनुमति पर आरोपपत्र दायर हो सकता है लेकिन कोर्ट में अगर साबित भी होता है कि कन्हैया ने भारत विरोधी नारे लगाए थे तो जस्टिस एएस आनंद के फ़ैसले की नज़ीर ज़रूर दी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने भी फ़रवरी के तीसरे हफ़्ते में एक कार्यक्रम में कहा कि अमूल्या पर सेडिशन यानी राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज करना क़ानून का दुरुपयोग है.
उन्होंने कहा, "ये स्पष्ट रूप से क़ानून का दुरुपयोग है. इसमें राजद्रोह का मामला कहां से बनता है? यहां तक कि उस लड़की ने जो कुछ भी कहा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए इंडियन पीनल कोड में कोई प्रावधान नहीं है. राजद्रोह तो दूर की बात है. उस पर किसी भी किस्म का कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है."
जस्टिस रेड्डी ने कहा, "अगर अमरीका ज़िंदाबाद या ट्रंप ज़िंदाबाद कहने कहने में कोई दिक़्क़त नहीं है तो पाकिस्तान ज़िदाबाद कहने में भी कोई दिक़्क़त नहीं है."
अमूल्या बेंगलुरु यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की छात्रा हैं और उन्हें इस मामले में अधिकतम आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है. जस्टिस रेड्डी ने कहा कि इस मामले में कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना होगा, नहीं तो अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले बढ़ते जाएंगे.
जस्टिस रेड्डी ने कहा, "पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहना तब तक कोई अपराध नहीं है जब तक कि भारत का पाकिस्तान के बीच कोई युद्ध नहीं हो रहा हो या फिर पाकिस्तान को शत्रु मुल्क घोषित न किया गया हो. जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान से भारत के संबंध अच्छे नहीं हैं लेकिन दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध अब भी बने हुए हैं."
जून 2017 में क्रिकेट चैंपियंस ट्रोफी में भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने के आरोप में 20 मुसलमानों को गिरफ़्तार किया गया था. ये मामला मध्य प्रदेश और राजस्थान का था. इन पर राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया गया था. हालांकि बाद में मध्य प्रदेश के 15 लोगों पर से ये मामला हटाना पड़ा था. क्या भारत-पाकिस्तान के मैच में पाकिस्तान की जीत पर ख़ुशी मनाना राजद्रोह है?
पिछले महीने 21 फ़रवरी को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में टी-20 महिला वर्ल्ड कप का ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मैच था. इस मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 17 रनों से हरा दिया. मैच के बाद ऑस्ट्रेलिया की खिलाड़ी प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रही थीं.
इस प्रेस कॉफ़्रेंस में एसबीएस के पत्रकार विवेक कुमार भी थे. विवेक कहते हैं कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अलिसा हेली ने भारतीय दर्शकों की तारीफ़ की और कहा कि उन्हें अच्छा लगा कि इतनी बड़ी संख्या लोग उन्हें देखने आए थे.
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